ब्रिटेन के राजकुमार एंड्रयू को अब अपना “प्रिंस” का खिताब गंवाना पड़ा है। साथ ही उन्हें विंडसर के रॉयल लॉज महल से भी बाहर जाना होगा।

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दरअसल, यौन अपराध के दोषी जेफ्री एप्सटीन के साथ उनके संबंधों को लेकर बीते कुछ हफ्तों से चल रही गहन जांच के बाद यह निर्णय लिया गया है।

गुरुवार (30 अक्टूबर) रात को बकिंघम पैलेस की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि अब राजा (किंग) के भाई को “एंड्रयू माउंटबैटन विंडसर” नाम से जाना जाएगा।

एंड्रयू ने अपने निजी जीवन पर उठे सवालों के कारण इस महीने की शुरुआत में खुद ही अपनी अन्य शाही उपाधियाँ छोड़ दी थीं, जिनमें “ड्यूक ऑफ यॉर्क” की उपाधि भी शामिल थी।

वर्जीनिया जिउफ्रे का मरणोत्तर आत्मकथ्य इसी महीने प्रकाशित हुआ है। इस किताब में कई जगह यह दावा किया गया है कि किशोरावस्था में वर्जीनिया ने प्रिंस एंड्रयू के साथ तीन बार शारीरिक संबंध बनाए थे। हालांकि, एंड्रयू ने इन सभी आरोपों को हमेशा नकारा है।

इन ताज़ा घटनाओं पर वर्जीनिया जिउफ्रे के परिवार ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “वर्जीनिया ने अपने सच और अद्भुत साहस के बल पर एक ब्रिटिश राजकुमार को भी झुकने पर मजबूर कर दिया।”

इस बीच, बकिंघम पैलेस ने अपने बयान में कहा कि राजा ने आज प्रिंस एंड्रयू की उपाधियाँ, खिताब और सम्मान आधिकारिक रूप से वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

“अब रॉयल लॉज की लीज़ छोड़ने के लिए आधिकारिक नोटिस जारी किया गया है,” ऐसा बकिंघम पैलेस ने बताया।

अब एंड्रयू को सैंड्रिंघम एस्टेट के एक निजी आवास में रहने की व्यवस्था दी जाएगी, जिसका खर्च खुद किंग चार्ल्स उठाते हैं।

बयान के अनुसार, “भले ही एंड्रयू लगातार अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार करते रहे हैं, फिर भी यह कार्रवाई आवश्यक मानी गई।”

पैलेस ने यह भी कहा कि वे “किसी भी तरह के उत्पीड़न या शोषण के शिकार लोगों के साथ दृढ़ता से खड़े हैं।”

एंड्रयू की दोनों बेटियाँ, यूजीन और बीएट्रिस, अपनी “प्रिंसेस” की उपाधियाँ बरकरार रखेंगी।

साथ ही, एंड्रयू अभी भी राजगद्दी के उत्तराधिकार की सूची में आठवें स्थान पर हैं।

ऐसा भी माना जा रहा है कि एंड्रयू की पूर्व पत्नी सारा फर्ग्यूसन को भी रॉयल लॉज से बाहर जाना होगा और उनके लिए अलग से रहने की व्यवस्था की जा रही है।

इस महीने तक सारा के पास “डचेस ऑफ यॉर्क” की उपाधि थी, लेकिन जब एंड्रयू ने “ड्यूक ऑफ यॉर्क” की उपाधि स्वेच्छा से छोड़ दी, तब सारा ने भी अपना विवाह-पूर्व उपनाम “फर्ग्यूसन” फिर से अपनाया।

जानकारी के मुताबिक, एंड्रयू से “प्रिंस” का खिताब वापस लेने के निर्णय पर ब्रिटेन सरकार से भी चर्चा हुई थी, और सरकार ने इस निर्णय का समर्थन किया।

उन्होंने कहा, “यह एक बड़ी घटना है और किंग के लिए भी यह बहुत महत्वपूर्ण फैसला है। मैं इस निर्णय का पूरी तरह से समर्थन करती हूँ।”

बढ़ते दबाव का नतीजा

एंड्रयू की शाही उपाधियाँ वापस लेने का यह निर्णय बीते कुछ हफ्तों से राजघराने पर बढ़ते दबाव का परिणाम माना जा रहा है।

वर्जीनिया जिउफ्रे की आत्मकथा में फिर से यौन शोषण के आरोपों का उल्लेख आने के बाद एंड्रयू और यौन अपराधी जेफ्री एप्सटीन के रिश्तों पर विवाद फिर भड़क उठा।

हालाँकि एंड्रयू ने वर्जीनिया द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को नकारा है, लेकिन इस महीने की शुरुआत में 2011 के कुछ ईमेल सामने आए थे, जिनसे पता चला कि एप्सटीन से “दोस्ती खत्म” होने का दावा करने के बाद भी दोनों कुछ महीनों तक संपर्क में थे।

हाल के दिनों में एंड्रयू की आलीशान जीवनशैली और खर्चों ने भी लोगों का ध्यान खींचा।

कई लोगों ने सवाल उठाया — बिना किसी आधिकारिक शाही ज़िम्मेदारी के वे इतना विलासितापूर्ण जीवन कैसे जी रहे हैं?

एंड्रयू 2004 से रॉयल लॉज में रह रहे हैं। उन्होंने 2003 में क्राउन एस्टेट नामक कंपनी के साथ 75 साल की लीज़ पर हस्ताक्षर किए थे।

विंडसर एस्टेट में स्थित यह “ग्रेड-2” श्रेणी का रॉयल लॉज बेहद भव्य है। इसमें गार्डनर्स कॉटेज, चैपल लॉज, छह बेडरूम वाला कॉटेज और सुरक्षाकर्मियों के लिए आवास भी हैं।

यौन अपराधी को पार्टी में बुलाया

पिछले हफ्ते यह जानकारी सामने आई कि एंड्रयू इस महल का खर्च कैसे उठा रहे थे।

रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने सालाना किराए के बजाय एकमुश्त बड़ी रकम चुकाई थी — लगभग 8 मिलियन पाउंड (करीब 93 करोड़ रुपये)।

नैशनल ऑडिट ऑफिस की रिपोर्ट में बताया गया है कि इस रकम के जरिए उन्होंने 75 साल की लीज़ के लिए हर साल किराया देने से छुटकारा पा लिया था।

एक और खुलासे में पता चला कि 2006 में जब अमेरिका में नाबालिग लड़की के यौन शोषण के मामले में जेफ्री एप्सटीन के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ था, तो उसके दो महीने बाद ही एंड्रयू ने उसे अपनी बेटी बीएट्रिस के जन्मदिन की पार्टी में मेहमान के रूप में बुलाया था।

हालांकि अब एंड्रयू ने इस पर कोई प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया है।

बकिंघम पैलेस की 30 अक्टूबर की घोषणा को प्रिंस एंड्रयू से जुड़े विवादों को शांत करने की कोशिश माना जा रहा है। अब उन्हें सिर्फ एंड्रयू माउंटबैटन विंडसर के नाम से जाना जाएगा।

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