Fantan Doctor Case : महिला डॉक्टर के साथ क्या-क्या हुआ? आखिरकार दुखद अंत A टू Z पूरी कहानी

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Phaltan Doctor Death Case Inside Story: बार-बार शिकायत करने के बावजूद भी कार्रवाई न होने की वजह से आखिरकार बीड जिले की इस महिला डॉ ने अपनी जान दे दी है । जून महीने से शुरू हुए इस मामले की पूरी घटनाक्रम जानकारी सामने आई है

फलटण महिला डॉक्टर डेथ केस: पुलिस और राजनीति के दबाव से तंग आकर आत्महत्या

सातारा जिले के फलटण उपजिला अस्पताल में कार्यरत महिला चिकित्सक ने पुलिस और राजनीतिक दबाव से परेशान होकर आत्महत्या कर ली।
मूल रूप से बीड जिले की रहने वाली इस डॉक्टर ने फलटण के एक नामी होटल में फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त की।
पिछले पांच महीनों से इस महिला डॉक्टर का उत्पीड़न चल रहा था। बार-बार शिकायत के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई न होने के कारण। आखिरकार, उसे महिला डॉक्टर यह कदम उठाना पड़ा और अपनी जान दे दी

अब तक क्या-क्या हुआ? सभी घटनाएं विस्तार से जाने

19 जून 2025:
डॉक्टर ने फलटण के उपविभागीय पुलिस अधिकारी (DySP) के पास PSI गोपाल बादणे और अन्य अधिकारियों द्वारा किए जा रहे लगातार उत्पीड़न और यौन शोषण की शिकायत लिखित रूप में दर्ज कराई थी।
मगर इस शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। यह बड़ी प्रशासनिक चूक अब जांच के दायरे में है।

जून – अक्टूबर 2025:
इस दौरान डॉक्टर पर लगातार दबाव बनाया गया। फलटण ग्रामीण पुलिस ने उनके खिलाफ “चिकित्सीय जांच में बाधा डालने” का आरोप लगाकर विभागीय जांच शुरू की।
पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के बीच शव परीक्षण (पोस्टमॉर्टम) के मामलों में मतभेद के कारण उन पर अतिरिक्त तनाव बढ़ा।
वरिष्ठ अधिकारियों को लिखे पत्रों में उन्होंने मानसिक उत्पीड़न, अवसाद और आत्महत्या के विचारों का उल्लेख किया था।

23 अक्टूबर 2025:
भाऊबीज की रात करीब 10:30 बजे, डॉक्टर फलटण स्थित होटल के कमरे में फांसी पर लटकी हुई मिलीं।
वो अस्पताल के काम के चलते अक्सर वहीं ठहरती थीं।

23 अक्टूबर 2025:
उनके हाथ की हथेली पर लिखे सुसाइड नोट में PSI गोपाल बादणे (पांच महीने से यौन और मानसिक उत्पीड़न के आरोप) और प्रशांत बंकर (मानसिक उत्पीड़न का आरोप) के नाम थे।
सुसाइड नोट की सामग्री और घटनाओं की पृष्ठभूमि से स्पष्ट है कि लगातार प्रताड़ना के कारण ही उन्होंने यह कदम उठाया।

23–24 अक्टूबर 2025:
परिवार और सहकर्मी डॉक्टरों का आरोप है कि संवेदनशील शव परीक्षण मामलों में दस्तावेज बदलने का दबाव उन पर डाला जा रहा था।
इससे उनकी मानसिक स्थिति और बिगड़ गई थी।

24 अक्टूबर 2025:
सातारा पुलिस ने PSI गोपाल बादणे (बलात्कार, आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप) और प्रशांत बंकर के खिलाफ मामला दर्ज किया।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के आदेश पर PSI बादणे को तत्काल निलंबित कर दिया गया और सख्त जांच के निर्देश दिए गए।

24–25 अक्टूबर 2025:
एक आरोपी गिरफ्तार: प्रशांत बंकर को गिरफ्तार किया गया है, जबकि मुख्य आरोपी PSI गोपाल बादणे अब भी फरार है।
उनकी तलाश के लिए विशेष टीमें रवाना की गई हैं।
सुसाइड नोट का फॉरेंसिक परीक्षण जारी है।
महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग ने पहले की शिकायतों पर कार्रवाई न होने को लेकर जांच और जवाबदेही तय करने की मांग की है।

वो सांसद कौन हैं? जो नाम सामने आ रहा है

इस पूरे मामले में डॉक्टर ने अपने बयान में यह भी कहा था कि एक सांसद और उनके दो पीए उनसे फोन पर संपर्क कर रहे थे।
हालांकि उन्होंने सांसद का नाम नहीं लिखा, जिससे सवाल उठ रहे हैं कि वह वर्तमान या पूर्व सांसद हैं।
ठाकरे गुट के नेता अंबादास दानवे ने भाजपा नेता और पूर्व सांसद रणजीतसिंह निंबाळकर का नाम लिया है।
साथ ही उनके पीए — राजेंद्र शिंदे और नागटिळक — पर भी इस मामले में संलिप्तता के गंभीर आरोप लगाए हैं।

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