ED ( ईडी ) अनिल अंबानी समूह की 7500 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त की है।

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अनिल अंबानी की कंपनियों पर ईडी की बड़ी कार्रवाई हुई है, जिसमें करीब 7500 करोड़ रुपये से ज़्यादा की संपत्ति ज़ब्त की गई। ईडी ने सोमवार (3 नवंबर) को दो अलग-अलग बयान जारी कर इसकी जानकारी दी।

ईडी ने पीएमएलए (PMLA) 2002 के कानून के तहत, रिलायंस अनिल धीरूभाई अंबानी समूह की कुल 3,083 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की 42 से ज़्यादा संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त किया है।

जब्त की गई संपत्तियों में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड की 30, आधार प्रॉपर्टी कंसल्टेंसी प्रा. लि. की 5, और मोहनबीर हाइटेक बिल्ड प्रा. लि. की 4 संपत्तियाँ शामिल हैं।

इसके अलावा गेम्सा इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट प्रा. लि., विहान 43 रियल्टी प्रा. लि. (पहले कुंजबिहारी डेवलपर्स प्रा. लि.), और कैम्पियन प्रॉपर्टीज लि. की एक-एक संपत्ति भी जब्त की गई है।

इन संपत्तियों में मुंबई के पाली हिल स्थित निवास, नई दिल्ली के महाराजा रणजीत सिंह मार्ग पर स्थित रिलायंस सेंटर, और दिल्ली, नोएडा, गाज़ियाबाद, मुंबई, पुणे, ठाणे, हैदराबाद, चेन्नई, कांचीपुरम तथा पूर्व गोदावरी में स्थित अन्य संपत्तियाँ शामिल हैं।

ईडी ने कहा है कि यह कार्रवाई आरकॉम (RCom) के एसबीआई बैंक धोखाधड़ी मामला, आरसीएएफएल (RCAFL) और आरएचएफएल (RHFL) के यस बैंक धोखाधड़ी मामलों से जुड़ी है।

नवी मुंबई स्थित धीरूभाई अंबानी नॉलेज सिटी (DAKC) की 132 एकड़ से अधिक ज़मीन भी ज़ब्त की गई है, जिसकी मौजूदा कीमत 4,462 करोड़ रुपये से ज़्यादा बताई जा रही है। यह कार्रवाई रिलायंस कम्युनिकेशन्स लिमिटेड के बैंक फ्रॉड केस से संबंधित है।

इसके साथ ही, समूह की कुल ज़ब्त संपत्ति का मूल्य अब 7,500 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।

कभी मुकेश अंबानी से ज़्यादा प्रसिद्ध थे अनिल अंबानी

मुकेश और अनिल अंबानी के बीच संपत्ति के बँटवारे के बाद, 2007 तक दोनों भाई फोर्ब्स की अरबपतियों की सूची में काफी ऊपर थे। उस समय मुकेश अंबानी, अनिल अंबानी से थोड़े ज़्यादा अमीर थे।

उस साल की सूची के अनुसार, अनिल अंबानी की कुल संपत्ति 45 अरब डॉलर थी, जबकि मुकेश अंबानी की 49 अरब डॉलर।

2008 में कई लोगों को लगता था कि छोटा भाई अनिल, बड़े भाई मुकेश को पीछे छोड़ देगा, खासकर रिलायंस पावर के पब्लिक इश्यू से पहले।

माना जा रहा था कि उनके इस बड़े प्रोजेक्ट का एक शेयर 1000 रुपये तक जाएगा — अगर ऐसा होता, तो अनिल अंबानी सचमुच मुकेश अंबानी को पछाड़ देते।

एक दशक पहले अनिल अंबानी सबसे अमीर भारतीय बनने के करीब थे। उनके उद्योग और नए वेंचर्स तेज़ी से बढ़ रहे थे, और उन्हें एक दूरदर्शी और महत्वाकांक्षी उद्यमी माना जाता था।

अर्थशास्त्रियों का मानना था कि अनिल अंबानी में 21वीं सदी के बिजनेस लीडर बनने की क्षमता है और उनके नेतृत्व में भारत से एक वैश्विक कंपनी उभरेगी।

कई लोगों का मानना था कि अनिल अपने आलोचकों और बड़े भाई दोनों को गलत साबित करेंगे — लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

बढ़ता कर्ज और गिरावट

2002 में धीरूभाई अंबानी के निधन के बाद, कंपनी की सफलता चार मुख्य बातों पर टिकी थी —

  1. बड़े प्रोजेक्ट्स का सही प्रबंधन,
  2. सरकार के साथ मजबूत संबंध,
  3. मीडिया प्रबंधन,
  4. निवेशकों के विश्वास को बनाए रखना।

मुकेश अंबानी ने इन सभी बातों को बनाए रखा, जबकि अनिल अंबानी इन मोर्चों पर कमजोर पड़ गए।

2010 में गैस विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला अनिल अंबानी के खिलाफ गया, जिसके बाद रिलायंस पावर के शेयरों में भारी गिरावट आई। इसके बाद उनका सफर और मुश्किल होता गया।

ऐसे में अनिल अंबानी को घरेलू और विदेशी बैंकों व वित्तीय कंपनियों से कर्ज लेना पड़ा।

पिछले एक दशक में जहाँ मुकेश अंबानी का कारोबार लगातार बढ़ता गया, वहीं अनिल अंबानी पर कर्ज का बोझ बढ़ता चला गया।

फोर्ब्स के अनुसार, पिछले करीब दस सालों से मुकेश अंबानी भारत के सबसे अमीर व्यक्ति बने हुए हैं।

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