एग्ज़िट पोल क्या होता है और इसे कैसे किया जाता है?
“एग्ज़िट” का मतलब होता है बाहर निकलना, और “पोल” यानी मतदान या सर्वे।
जब कोई व्यक्ति वोट डालकर मतदान केंद्र से बाहर निकलता है, तो एग्ज़िट पोल करने वाली एजेंसियाँ उसके पास जाकर पूछती हैं कि उसने किस पार्टी या उम्मीदवार को वोट दिया।
इन एजेंसियों के कर्मचारी मतदान केंद्रों के बाहर तैनात रहते हैं।
जैसे-जैसे मतदाता बाहर आते हैं, उनसे पूछा जाता है —
आपने किस पार्टी को वोट दिया?
मुख्यमंत्री पद के लिए आपका पसंदीदा उम्मीदवार कौन है?
इसी तरह के कई सवाल पूछे जाते हैं।
आमतौर पर हर मतदान केंद्र पर लगभग 10 में से 1 व्यक्ति से यह जानकारी ली जाती है।
बड़े केंद्रों में 20 लोगों में से 1 से सवाल किए जाते हैं।
फिर सभी मतदाताओं से मिली जानकारी का विश्लेषण (analysis) किया जाता है और अनुमान लगाया जाता है कि कौन सी पार्टी को कितनी सीटें मिल सकती हैं।

भारत की प्रमुख एग्ज़िट पोल एजेंसियाँ
भारत में एग्ज़िट पोल करने वाली प्रमुख संस्थाएँ हैं –
C-Voter
Axis My India
CNX Bharat
इसके अलावा चुनाव के समय कई नई कंपनियाँ भी सामने आती हैं।
⚖ एग्ज़िट पोल के लिए कानून और नियम
भारत का निर्वाचन आयोग (Election Commission) एग्ज़िट पोल के लिए कुछ नियम तय करता है ताकि चुनाव प्रक्रिया पर कोई प्रभाव न पड़े।
इन नियमों के अनुसार:
मतदान के दिन एग्ज़िट पोल के नतीजे प्रसारित नहीं किए जा सकते।
मतदान समाप्त होने तक किसी भी पोल का परिणाम सार्वजनिक करना कानूनी रूप से वर्जित है।
एग्ज़िट पोल का परिणाम जारी करने से पहले निर्वाचन आयोग से अनुमति लेनी होती है।

एग्ज़िट पोल के अनुमान कितने सही होते हैं?
एग्ज़िट पोल के अनुमान को अक्सर मौसम विभाग के अनुमान जैसा माना जाता है।
कभी यह सही निकलते हैं, कभी पूरी तरह गलत, और कभी करीब-करीब सही।
एग्ज़िट पोल दो मुख्य बातों का अनुमान लगाते हैं –
- मतदान प्रतिशत (voting percentage)
- पार्टियों को मिलने वाली सीटों की संख्या
हर एजेंसी का तरीका अलग होता है —
कुछ एजेंसियाँ फोन पर सर्वे करती हैं, तो कुछ फील्ड में जाकर लोगों से बात करती हैं।
इसीलिए अलग-अलग एग्ज़िट पोल के नतीजे अक्सर एक-दूसरे से अलग दिखते हैं।
भारत में एग्ज़िट पोल की शुरुआत कब हुई?
भारत में सबसे पहला एग्ज़िट पोल 1957 में,
Indian Institute of Public Opinion ने दूसरी आम चुनावों के दौरान किया था।
1980 में डॉ. प्रणय रॉय ने एग्ज़िट पोल किया था, और 1984 में उन्होंने दोबारा किया।
1996 में दूरदर्शन ने पत्रकार नलिनी सिंह के साथ मिलकर सर्वे कराया था,
जिसके लिए Centre for the Study of Developing Societies (CSDS) ने फील्ड सर्वे किया था।
उस दौर में एग्ज़िट पोल बहुत कम होते थे —
आज की तरह हर चैनल या संस्था नहीं, बस 1-2 पोल ही होते थे।
क्या एग्ज़िट पोल अन्य देशों में भी होते हैं?
हाँ, एग्ज़िट पोल सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई देशों में किए जाते हैं —
अमेरिका, दक्षिण अमेरिका, यूरोप, दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया में भी।
सबसे पहला एग्ज़िट पोल 1936 में अमेरिका में हुआ था,
जहाँ जॉर्ज गैलप और प्लॉट रॉबिन्सन ने न्यूयॉर्क शहर में राष्ट्रपति चुनाव पर सर्वे किया था।
उन्होंने अनुमान लगाया था कि फ्रैंकलिन रूज़वेल्ट चुनाव जीतेंगे — और यह अनुमान सही साबित हुआ था।
लोकसभा चुनाव 2024 का उदाहरण
2024 के लोकसभा चुनाव में अधिकतर एग्ज़िट पोल्स ने एनडीए (NDA) को भारी बहुमत का अनुमान दिया था —
औसतन 350 से 400 सीटों का अनुमान था।
लेकिन असल नतीजों में एनडीए को 293 सीटें मिलीं।
इससे साबित हुआ कि एग्ज़िट पोल करीब तो था, पर सटीक नहीं।
हरियाणा विधानसभा चुनाव उदाहरण
हरियाणा विधानसभा चुनाव में एग्ज़िट पोल ने कहा था कि
कांग्रेस को 50-55 सीटें मिलेंगी और सत्ता उसकी होगी,
जबकि भाजपा को 20-25 सीटें।
लेकिन असल में नतीजे उलटे निकले —
भाजपा को 48 सीटें और कांग्रेस को 37 सीटें मिलीं।
निष्कर्ष
एग्ज़िट पोल असल में जनता की राय पर आधारित एक अनुमान होता है,
कोई अंतिम परिणाम नहीं।
इसे वैज्ञानिक तरीके से किया जाता है, परंतु इसमें 100% सटीकता नहीं होती।
इसलिए एग्ज़िट पोल को सिर्फ एक संकेत (indicator) के रूप में ही देखा जाना चाहिए,
ना कि असली नतीजे के रूप में।
