दूध पीने के बाद कुछ लोगों को पेट दर्द क्यों होता है? जाने विस्तार से

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कुछ लोगों को दूध या दूध से बने पदार्थ खाने के बाद पेट फूलना, गैस, और दस्त जैसी पाचन संबंधी समस्याएँ होती हैं। इसका कारण होता है “लैक्टोज इनटॉलरेंस” यानी शरीर में लैक्टोज को पचाने में असमर्थता।

लैक्टोज क्या है?
लैक्टोज (दूध में पाई जाने वाली प्राकृतिक शर्करा) एक प्रकार की शक्कर होती है जो गाय, भैंस, बकरी, या भेड़ के दूध तथा उनसे बने खाद्य पदार्थों में मौजूद रहती है।

लैक्टोज इनटॉलरेंस क्या है?
जब शरीर लैक्टोज को तोड़ नहीं पाता या पचा नहीं पाता, तो यह समस्या उत्पन्न होती है। लैक्टोज को पचाने के लिए हमारी छोटी आंत (small intestine) में लैक्टेज (Lactase) नामक एंजाइम बनता है, जो दूध की शर्करा को तोड़ने का काम करता है।
अगर यह एंजाइम पर्याप्त मात्रा में नहीं बनता, तो दूध या दूध से बने उत्पादों को खाने पर शरीर में असहजता महसूस होती है।

लैक्टोज इनटॉलरेंस के लक्षण:
दूध या दूध से बने पदार्थ खाने के कुछ मिनटों या घंटों के भीतर ये लक्षण दिख सकते हैं –

पेट फूलना या गैस बनना

बार-बार डकार आना

पेट दर्द या असहजता

दस्त या कब्ज
कई बार त्वचा पर चकत्ते, सिरदर्द, जोड़ों में दर्द, थकान या ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई जैसी समस्याएँ भी हो सकती हैं।

अगर लंबे समय तक दस्त, कब्ज, मल में खून, पेट में सूजन या वजन तेजी से घट रहा है, तो तुरंत डॉक्टर (गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट) से सलाह लेनी चाहिए।

एलर्जी (Allergy) से फर्क क्या है?

लैक्टोज इनटॉलरेंस और दूध से एलर्जी दोनों अलग बातें हैं।
एलर्जी ज्यादा गंभीर होती है और इसके लक्षण खतरनाक हो सकते हैं, जैसे –

दूध पीने के तुरंत बाद होंठ, चेहरा, गला या जीभ सूज जाना

सूजन वाले हिस्से में खुजली या दाने निकलना

सांस लेने में कठिनाई

गला कड़ा होना या निगलने में परेशानी

होंठ, जीभ या त्वचा का नीला या पीला पड़ जाना

चक्कर, बेहोशी या सुन्नपन

ऐसे गंभीर लक्षण दिखने पर तुरंत अस्पताल जाना जरूरी है।

लैक्टोज किन चीजों में पाया जाता है?

लैक्टोज केवल दूध में ही नहीं बल्कि इन पदार्थों में भी पाया जा सकता है –

दूध, मक्खन, चीज़, मलाई, दही, आइसक्रीम

ब्रेड, बिस्किट, केक, सॉस, सलाद ड्रेसिंग, मिल्कशेक, प्रोटीन शेक

कुछ अनाज जैसे गेहूं, जौ, मक्का आदि से बने प्रसंस्कृत (processed) खाद्य पदार्थों में भी

लैक्टोज इनटॉलरेंस की जांच कैसे होती है?

1. लैक्टोज इनटॉलरेंस टेस्ट:


इससे पता चलता है कि आपकी पाचन प्रणाली लैक्टोज को कितनी अच्छी तरह पचा पाती है।
परीक्षण से पहले 4 घंटे कुछ नहीं खाना होता है, फिर लैक्टोज वाला पेय दिया जाता है और 2 घंटे तक खून के सैंपल लिए जाते हैं।

2. हाइड्रोजन ब्रीथ टेस्ट:


इसमें लैक्टोज वाला पेय पिलाने के बाद आपके सांसों में हाइड्रोजन की मात्रा मापी जाती है।
अगर हाइड्रोजन अधिक है, तो यह लैक्टोज इनटॉलरेंस का संकेत है।

3. स्टूल एसिड टेस्ट:


यह जांच बच्चों के लिए होती है। इसमें मल में लैक्टिक एसिड और अन्य फैटी एसिड की मात्रा मापी जाती है।

4. बायोप्सी (Biopsy):


गंभीर मामलों में छोटी आंत से ऊतक का नमूना लेकर जांच की जाती है।

इलाज क्या है?

लैक्टोज इनटॉलरेंस का कोई स्थायी इलाज नहीं है, क्योंकि ऐसा कोई तरीका नहीं जिससे शरीर ज्यादा लैक्टेज एंजाइम बना सके।
लेकिन आप लक्षणों को नियंत्रित कर सकते हैं –

लैक्टोज वाले खाद्य पदार्थों से परहेज करें या कम मात्रा में लें।

लैक्टोज सप्लीमेंट्स (Lactase tablets) खाने से लक्षण कम हो सकते हैं।

“लैक्टोज-फ्री” दूध या उत्पाद चुनें।

दही और हार्ड चीज़ जैसे पदार्थों में लैक्टोज बहुत कम होता है, इसलिए इन्हें सीमित मात्रा में लिया जा सकता है।

कई मामलों में लैक्टोज इनटॉलरेंस का कारण सीलिएक रोग (Celiac disease) भी होता है। अगर इसका इलाज हो जाए, तो लैक्टोज इनटॉलरेंस भी सुधर सकता है।

महत्वपूर्ण: टिप्पणी
दूध पोषक तत्वों से भरपूर होता है – इसमें कैल्शियम, प्रोटीन और विटामिन D होते हैं।
इसलिए यदि आपको लैक्टोज की समस्या है, तो वैकल्पिक रूप से लैक्टोज-फ्री उत्पाद या पौधों से बने दूध (जैसे बादाम, सोया, ओट्स दूध) का उपयोग करना बेहतर है।

स्रोत: WHO, US Centers for Disease Control (CDC), UK National Health Service (NHS))

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