मतदाता सूची की होगी फिर से जांच? ये दस्तावेज़ माने जाएंगे वैध!

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मुख्य चुनाव आयोग ने सोमवार को करीब 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों की व्यवस्थित जांच की प्रक्रिया को “स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR)” यानी विशेष गहन पुनरीक्षण के रूप में शुरू करने की घोषणा की है।

मतदाता सूची में जिनका नाम एक से अधिक बार दर्ज हुआ है, उनके नाम हटाने के साथ ही मृत मतदाताओं के नाम भी हटाने की यह पूरी प्रक्रिया आगे चलाई जाएगी, ऐसा चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है।

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने बिहार में मत चोरी अभियान के तहत लाखों वैध मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने का आरोप लगाया था।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि SIR का पहला चरण पूरा हो चुका है।

उन्होंने कहा कि हर चुनाव से पहले मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण आवश्यक है। पिछले कई दशकों से भारत के सभी राजनीतिक दल मतदाता सूची में गड़बड़ियों की शिकायत करते रहे हैं। मुख्य चुनाव आयोग ने 1951 से 2004 तक कुल आठ बार SIR किया था। पिछली बार यह प्रक्रिया 2002 से 2004 तक चली थी यानी लगभग 21 साल पहले।

बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले SIR की घोषणा की गई थी। वहाँ यह प्रक्रिया सफल रही और इसका सकारात्मक प्रभाव देखा गया, ऐसा आयोग ने बताया।

क्यों जरूरी है SIR?

इसकी कई वजहें हैं —
तेजी से हो रहा शहरीकरण, जनसंख्या का पलायन, नए युवा मतदाताओं की बढ़ती संख्या, और मतदाता सूची में अवैध विदेशी नागरिकों का नाम शामिल होना – ये सभी प्रमुख कारण हैं।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के अनुसार, बिहार के लोगों ने भी आयोग पर भरोसा जताया है। SIR के दौरान बड़ी संख्या में अधिकारी चुनाव आयोग के साथ मिलकर काम करते हैं।

हर 1000 मतदाताओं पर एक मतदान केंद्र होता है और प्रत्येक केंद्र पर एक बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) नियुक्त होता है।

SIR के लिए मान्य दस्तावेज़

ओळखपत्र (ID कार्ड), पेंशन पेमेंट ऑर्डर, पासपोर्ट, बोर्ड/विश्वविद्यालय की डिग्री, निवास प्रमाण पत्र, आधार कार्ड और अन्य कई दस्तावेज़ इसमें शामिल हैं।

आधार कार्ड को लेकर अब भी भ्रम है। मुख्य चुनाव आयुक्त ने स्पष्ट किया कि आधार नागरिकता, निवास या जन्मतिथि का प्रमाण नहीं है, लेकिन इसे पहचान पत्र के रूप में दैनिक उपयोग और SIR प्रक्रिया में इस्तेमाल किया जा सकता है।

SIR प्रक्रिया की महत्वपूर्ण तिथियाँ

प्रिंटिंग / प्रशिक्षण: 28 अक्टूबर से 3 नवंबर 2025

घर-घर जाकर मतदाताओं की जानकारी एकत्र करना: 4 नवंबर से 4 दिसंबर 2025

ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी: 9 दिसंबर 2025

आपत्तियाँ दर्ज करने की अवधि: 9 दिसंबर 2025 से 8 जनवरी 2026

सुनवाई और सत्यापन: 9 दिसंबर 2025 से 31 जनवरी 2026

अंतिम मतदाता सूची जारी: 7 फरवरी 2026

BLO का काम क्या होगा?

नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए फॉर्म-6 और घोषणापत्र एकत्र करना तथा उनकी जाँच या लिंकिंग करना।

मतदाताओं को EF फॉर्म भरने में सहायता करना।

प्रत्येक मतदाता के घर कम से कम तीन बार जाना।

शहरी या अस्थायी रूप से स्थानांतरित मतदाता ऑनलाइन EF फॉर्म भर सकते हैं।

मृत, स्थायी रूप से स्थानांतरित या एक से अधिक स्थानों पर दर्ज मतदाताओं की पहचान करना।

मतगणना के दौरान EF फॉर्म के अलावा कोई अन्य दस्तावेज़ एकत्र करने की आवश्यकता नहीं होगी।

असम का नाम सूची में क्यों नहीं है?

जब मुख्य चुनाव आयुक्त से पूछा गया कि असम को 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की SIR सूची में क्यों शामिल नहीं किया गया, तो उन्होंने कहा —
“आपको मालूम होगा कि भारतीय नागरिकता कानून में असम के लिए अलग प्रावधान है। साथ ही, वहाँ सर्वोच्च न्यायालय की देखरेख में नागरिकता सत्यापन कार्यक्रम लगभग पूरा हो चुका है।”

“इसलिए 24 जून को जारी SIR आदेश पूरे देश पर लागू है, परंतु असम पर नहीं। असम के लिए अलग सुधार आदेश जारी किए जाएंगे।”

हालांकि, बिहार में विपक्षी दलों ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण पर सवाल उठाए हैं।

वहीं, पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले SIR प्रक्रिया के खिलाफ शनिवार को सैकड़ों लोगों ने प्रदर

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