मोंथा चक्रवात महाराष्ट्र में इन जगहों पर करेगा असर, कोकण में तेज हवाओं का अलर्ट

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मोंथा चक्रवात के प्रभाव से महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में भी कई जगहों पर तेज हवाओं के साथ हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई है। इस चक्रवात से बना मौसमीय प्रभाव हिमालय तक महसूस किया जा रहा है।

आंध्र प्रदेश में मछलीपट्टनम और काकीनाडा के बीच टकराने के बाद वहां कई जगहों पर भारी बारिश हुई है। कई घरों और सड़कों को नुकसान भी हुआ है।

मोंथा चक्रवात धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है और इसके प्रभाव से आंध्र प्रदेश, तेलंगाना के साथ विदर्भ और मराठवाड़ा में भी कई जगहों पर जोरदार बारिश की संभावना है।

इसके बाद इस चक्रवात के अवशेष बिहार और पश्चिम बंगाल की ओर बढ़ने की संभावना है। गुरुवार और शुक्रवार को यह प्रणाली नेपाल तक पहुंचेगी, जहां भारी बारिश और बर्फबारी होने की संभावना जताई जा रही है।

इस बीच, नेपाल में हिमालय के निचले इलाकों में भारी बर्फबारी के कारण कई पर्वतारोहण अभियान रद्द कर दिए गए हैं। नेपाल सरकार ने एवरेस्ट, अन्नपूर्णा, मन्सालू और धौलागिरी जैसे पर्वतों पर फिलहाल चढ़ाई न करने की चेतावनी जारी की है।

रॉयटर्स के अनुसार, एवरेस्ट बेस कैंप के पास लोबुचे में फंसे पर्वतारोहियों को बचाने पहुंचे एक हेलीकॉप्टर की बर्फ पर फिसलकर दुर्घटना हो गई।

नेपाल में करीब 1,500 पर्वतारोही अलग-अलग जगहों पर ट्रेकिंग कर रहे हैं, जिनमें से लगभग 200 विदेशी नागरिक हैं। कई जगहों पर बर्फबारी के कारण वे फंसे हुए हैं।

‘मोंथा’ चक्रवात का सफर

बंगाल की खाड़ी में 22 अक्टूबर के आसपास बनी एक निम्न दबाव प्रणाली ने 26 अक्टूबर 2025 की रात को चक्रवात का रूप लिया, जिसे ‘मोंथा’ नाम दिया गया।

यह नाम थाईलैंड ने सुझाया है, जिसका अर्थ है “सुंदर और सुगंधित फूल”।

27 अक्टूबर को यह चक्रवात “Severe Cyclonic Storm” यानी अति तीव्र चक्रवात बन गया।
जब किसी चक्रवात की हवा की गति 88 से 117 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुँचती है, तो उसे अति तीव्र चक्रवात कहा जाता है।

मोंथा चक्रवात जब तट से टकराया, तब हवाओं की रफ्तार 90 से 100 किमी प्रति घंटा थी और झोंके 110 किमी प्रति घंटा तक पहुँचे।
यह चक्रवात काकीनाडा और मछलीपट्टनम के बीच टकराया।

महाराष्ट्र में अलर्ट

अरबी सागर में बना डिप्रेशन (निम्न दाब क्षेत्र) अब भी सक्रिय है। इसके कारण पश्चिमी तटीय इलाकों में मछुआरों और जहाजों को सतर्क रहने की चेतावनी दी गई है।

इस डिप्रेशन के प्रभाव से कोकण और घाट इलाकों में पिछले 24 घंटों में कई जगहों पर तेज हवाओं और बिजली के साथ भारी बारिश हुई है।

29 अक्टूबर को गडचिरोली, चंद्रपुर, यवतमाल, नांदेड़, हिंगोली और परभणी में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया।

30 अक्टूबर को पालघर, नाशिक, धुले, नंदुरबार, जळगांव, संभाजीनगर, जालना, परभणी, बुलढाणा, अकोला, अमरावती, वर्धा, नागपुर, भंडारा, गोंदिया, गडचिरोली और चंद्रपुर जिलों में मेघगर्जन और बारिश के लिए यलो अलर्ट जारी है।

चक्रवातों को नाम कैसे दिए जाते हैं?

आम लोगों तक मौसम की जानकारी आसानी से पहुँचाने के लिए चक्रवातों को नाम दिए जाते हैं। केवल तकनीकी शब्दों के बजाय नाम से पहचान करना आसान होता है।

चक्रवात की स्थिति के आधार पर यह तय होता है कि उसे हरिकेन, टाइफून या साइक्लोन कहा जाएगा।

भारत में चक्रवातों को नाम देने की परंपरा हाल के वर्षों में शुरू हुई है, जबकि विश्व स्तर पर यह पद्धति बहुत पुरानी है।
1953 से मायामी नेशनल हरिकेन सेंटर और वर्ल्ड मेटेरियोलॉजिकल ऑर्गनाइजेशन (WMO) द्वारा उष्णकटिबंधीय चक्रवातों को नाम दिए जा रहे हैं।

हवे का दबाव घटने और समुद्र का तापमान बढ़ने से बने ऐसे चक्रवात समय-समय पर भारतीय उपमहाद्वीप में असर करते रहते हैं — मोंथा भी उनमें से एक है।

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